ग्रंथ
पवित्र ग्रन्थ • Sacred Scriptures

Granth

The Eternal Wisdom of Sacred Hindu Scriptures

From the primordial Vedas to the devotional poetry of the Bhakti saints, the sacred texts of Sanatan Dharma are the eternal lighthouse guiding humanity towards truth, righteousness, and liberation.

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सनातन वाङ्मय • Sacred Scriptures of the Vedic Tradition

ग्रंथ (Granth)

सनातन धर्म के ज्ञान, दर्शन, भक्ति और आचार-संहिता को संजोए रखने वाली कालजयी पवित्र ग्रंथ — ज्ञान के अनंत आलोक।

श्रुति
वेद (Veda)

सनातन धर्म के सर्वप्राचीन आधारभूत ग्रंथ, ज्ञान के मूल स्रोत।

ज्ञानकांड
उपनिषद (Upanishad)

वेदों का दार्शनिक सार — ब्रह्म, जीव तथा प्रकृति के गूढ़ रहस्यों का साक्षात्कार।

इतिहास
पुराण (Purana)

सृष्टि, देवों एवं राजाओं की कथाओं के माध्यम से धर्म व संस्कृति की सुलभ प्रस्तुति।

स्मृति
धर्मशास्त्र (Dharmashastra)

सामाजिक, नैतिक और वैयक्तिक जीवन को सुव्यवस्थित करने वाली आचार संहिता।

उपदेश
भगवद्गीता (Bhagavad Gita)

महाभारत की दार्शनिक मणि — निष्काम कर्म, ज्ञान और भक्ति का सर्वांगीण उपदेश।

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श्रुति परंपरा • The Four Sacred Vedas

वेद (Veda)

सनातन ज्ञान के चार शाश्वत ग्रंथ — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद

प्राचीनतम वेदRigveda

ऋग्वेद

सबसे प्राचीन वेद — देवताओं की स्तुति में रचित ऋचाओं का संग्रह, जो सनातन ज्ञान का मूल स्रोत है।

यज्ञीय वेदYajurveda

यजुर्वेद

यज्ञ कर्मकांड व विधियों और मंत्रों का संग्रह; गद्य एवं पद्य दोनों रूपों में संकलित।

गायन वेदSamaveda

सामवेद

ऋचाओं का संगीतमय गायन; भारतीय संगीत कला का उद्गम स्रोत और देवताओं की मधुर उपासना।

व्यावहारिक वेदAtharvaveda

अथर्ववेद

दैनिक जीवन, आरोग्य और भौतिक कल्याण से जुड़े मंत्र तथा व्यावहारिक ज्ञान।

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वेदांत ज्ञानधारा • Seats of Vedantic Wisdom

उपनिषद (Upanishad)

सत्य एवं ब्रह्म ज्ञान का प्रामाणिक स्रोत — उपनिषद वेदों के ज्ञान भाग हैं, जो आत्मज्ञान एवं ब्रह्मज्ञान की प्रत्यक्ष अनुभूति कराते हैं।

यजुर्वेदIsha Upanishad

ईश उपनिषद

सर्वव्यापी ब्रह्म का दर्शन — 'ईशावास्यमिदं सर्वम्' के माध्यम से त्यागपूर्वक भोग का संदेश देता है।

सामवेदKena Upanishad

केन उपनिषद

'केन' (किसके द्वारा प्रेरित?) — इंद्रियों एवं मन को शक्ति देने वाली पराशक्ति (ब्रह्म) का अन्वेषण करता है।

कृष्ण यजुर्वेदKatha Upanishad

कठ उपनिषद

नचिकेता और यमराज के प्रसिद्ध संवाद के माध्यम से मृत्यु और आत्मज्ञान के गूढ़ रहस्यों का उद्घाटन करता है।

अथर्ववेदPrashna Upanishad

प्रश्न उपनिषद

छह ऋषियों के महर्षि पिप्पलाद से पूछे गए छह गंभीर प्रश्नों के आधार पर ब्रह्मविद्या की व्याख्या।

अथर्ववेदMundaka Upanishad

मुण्डक उपनिषद

परा और अपरा विद्या का भेद तथा भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' यहीं से उद्धृत है।

अथर्ववेदMandukya Upanishad

माण्डूक्य उपनिषद

सबसे लघु उपनिषद (१२ मंत्र) — ॐकार के रहस्य एवं चेतना की चार अवस्थाओं का प्रत्यक्ष प्रतिपादन।

कृष्ण यजुर्वेदTaittiriya Upanishad

तैत्तिरीय उपनिषद

पञ्चकोश का सिद्धांत तथा 'सत्यं वद, धर्मं चर' एवं 'मातृदेवो भव, पितृदेवो भव' जैसी कालजयी शिक्षाएँ।

ऋग्वेदAitareya Upanishad

ऐतरेय उपनिषद

महावाक्य 'प्रज्ञानं ब्रह्म' (चेतना ही ब्रह्म है) — सृष्टि की उत्पत्ति और आत्मा के स्वरूप का विशद विवेचन।

सामवेदChandogya Upanishad

छांदोग्य उपनिषद

विशालकाय उपनिषद — प्रसिद्ध 'तत्त्वमसि' (वह तुम ही हो) और उद्दालक-श्वेतकेतु संवाद की पावन भूमि।

शुक्ल यजुर्वेदBrihadaranyaka Upanishad

बृहदारण्यक उपनिषद

सबसे बड़ा उपनिषद — याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी का संवाद; 'अहं ब्रह्मास्मि' और 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' का उद्घोष।

कृष्ण यजुर्वेदShvetashvatara Upanishad

श्वेताश्वतर उपनिषद

परमेश्वर, माया और जीव के संबंध का उद्घाटन; ईश्वर भक्ति और शरणागति का दार्शनिक आधार प्रस्तुत करता है।

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श्री अष्टादश महापुराण • Sacred Mahapuranas

पुराण (Purana)

अठारह महापुराणों में सनातन इतिहास, ब्रह्मांड विज्ञान, वंशावलियों तथा धर्म, भक्ति व सदाचार का अमूल्य समन्वय मिलता है।

१

ब्रह्म पुराण (Brahma Purana)

आद्यपुराण कहा गया है — सृष्टि रचना और सूर्यदेव की उपासना का विस्तृत वर्णन मिलता है।

२

पद्म पुराण (Padma Purana)

भगवान विष्णु की स्तुति, तीर्थ यात्रा और विभिन्न व्रतों का विशद वर्णन पञ्चखण्डों में संकलित।

३

विष्णु पुराण (Vishnu Purana)

भगवान विष्णु की महिमा, उनके अवतारों तथा ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र का अत्यंत प्रामाणिक निरूपण।

४

शिव पुराण (Shiva Purana)

भगवान शिव की महिमा, ज्योतिर्लिंगों की गाथा और निष्काम भक्ति व योग का अनुपम समन्वय।

५

श्रीमद्भागवत पुराण (Bhagavata Purana)

श्रीकृष्ण की बाल-लीला, भक्ति रस का सर्वोत्कृष्ट स्रोत और वेदान्त का सार-तत्व माना जाता है।

६

नारद पुराण (Narada Purana)

देवर्षि नारद द्वारा कथित वेदांगों के रहस्य और विभिन्न तीर्थों का पावन महात्म्य।

७

मार्कण्डेय पुराण (Markandeya Purana)

देवी दुर्गा की महिमा वर्णित 'दुर्गा सप्तशती' इसी महापुराण का गौरवशाली अंग है।

८

अग्नि पुराण (Agni Purana)

विश्वकोशीय ज्ञान — आयुर्वेद, ज्योतिष, युद्ध कला और विभिन्न विद्याओं का अद्भुत संग्रह।

९

भविष्य पुराण (Bhavishya Purana)

भविष्य की घटनाओं और धर्म-सदाचार के नियमों का सूर्य-उपासना सहित विशेष वर्णन।

१०

ब्रह्मवैवर्त पुराण (Brahmavaivarta)

राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं और प्रकृति के सूक्ष्म स्वरूप का सुमधुर आख्यान।

११

लिंग पुराण (Linga Purana)

शिवलिंग की महत्ता, शिव-उपासना की विधि और शिव-प्रदत्त ज्ञान का दिव्य निरूपण।

१२

वराह पुराण (Varaha Purana)

भगवान विष्णु के वराह अवतार की अमर कथा तथा धर्म-संस्थापन का पावन संदेश।

१३

स्कन्द पुराण (Skanda Purana)

सबसे विशाल महापुराण — भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) तथा भारत के तीर्थों का अनुपम दिग्दर्शन।

१४

वामन पुराण (Vamana Purana)

भगवान विष्णु के वामन अवतार तथा दानवीर राजा बलि के उद्धार की परम पावन कथा।

१५

कूर्म पुराण (Kurma Purana)

भगवान विष्णु के कूर्म अवतार तथा समुद्र मंथन की अमर कथा और ईश्वर-ज्ञान का उपदेश।

१६

मत्स्य पुराण (Matsya Purana)

प्रलय काल में भगवान के मत्स्य अवतार एवं मनु को दिए ज्ञान व वास्तुशास्त्र का वर्णन।

१७

गरुड़ पुराण (Garuda Purana)

मृत्यु के उपरांत जीवात्मा की यात्रा, कर्मफल का विधान और मोक्ष प्राप्ति का विस्तृत दर्शन।

१८

ब्रह्माण्ड पुराण (Brahmanda)

सृष्टि की संपूर्ण रचना और ब्रह्मांड का भूगोल; विश्वप्रसिद्ध 'ललिता सहस्रनाम' इसी का पावन भाग है।

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आचार व न्याय संहिता • Codes of Conduct

स्मृति एवं धर्मसूत्र (Smriti)

Sacred Texts of Dharma, Law & Righteousness — समाज, परिवार व वैयक्तिक जीवन को धर्म के व्यावहारिक आधार पर ढालने वाले ग्रंथ।

स्मृति ग्रंथ

मनुस्मृति (Manusmriti)

प्राचीन भारत की सर्वाधिक प्रमुख स्मृति — सामाजिक व्यवस्था, राजधर्म एवं सदाचार का विस्तृत निरूपण।

स्मृति ग्रंथ

याज्ञवल्क्य स्मृति (Yajnavalkya)

प्रबुद्ध और व्यावहारिक आचार संहिता — न्याय, व्यवहार तथा प्रायश्चित्त का अत्यंत वैज्ञानिक विश्लेषण।

न्यायशास्त्र

नारद स्मृति (Narada Smriti)

विशुद्ध रूप से कानूनी विषयों — विवाद, ऋण, संपत्ति एवं न्याय प्रणाली पर विशेष जोर।

कलियुग विधान

पराशर स्मृति (Parashara Smriti)

कलियुग के अनुकूल मानव नियमों एवं प्रायश्चित्त कर्मों का सहजता से निर्देश करती है।

वैष्णव परंपरा

विष्णु स्मृति (Vishnu Smriti)

धार्मिक कर्तव्यों, सदाचार एवं दंड विधान का विस्तृत व सुव्यवस्थित निरूपण।

धर्मसूत्र

आपस्तम्ब धर्मसूत्र (Apastamba)

यज्ञ विधियों एवं गृहस्थ धर्म — शुल्ब सूत्र एवं ज्यामिति गणनाओं पर भी प्रभाव।

धर्मसूत्र

गौतम धर्मसूत्र (Gautama)

सबसे प्राचीन धर्मसूत्र माना जाता है — वर्णाश्रम धर्म एवं चारित्रिक शुद्धता पर बल।

धर्मसूत्र

बौधायन धर्मसूत्र (Baudhayana)

कल्पसूत्र परंपरा का भाग — प्राचीन प्रामाणिक आचार का विशद दस्तावेज़।

धर्मसूत्र

वशिष्ठ धर्मसूत्र (Vasistha)

सामाजिक व पारिवारिक संगठन, नियमों तथा सदाचार का प्रतिपादन करती है।

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ईश्वर लीला व दर्शन • The Great Epics

महाकाव्य (Mahakavya)

सनातन जीवन-दृष्टि और मानवीय आदर्शों को उजागर करने वाले महान इतिहास-काव्य

१
आदिकाव्य • २४,००० श्लोक

रामायण (Ramayana)

महर्षि वाल्मीकि रचित आदिकाव्य — श्रीराम के जीवन और मर्यादित पुरुषोत्तम आदर्शों की गाथा।

'रामो विग्रहवान् धर्मः' — धर्म के साक्षात स्वरूप
२
विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य • १,००,००० श्लोक

महाभारत (Mahabharata)

महर्षि वेदव्यास रचित विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य — धर्म, नीति, राजनीति एवं जीवन दर्शन का सागर।

'यतो धर्मस्ततो जयः' — जहाँ धर्म है, वहीं विजय है
३
गीतोपनिषद • ७०० श्लोक

भगवद्गीता (Bhagavad Gita)

महाभारत के भीष्म पर्व का अंग — कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया आत्मज्ञान और निष्काम कर्मयोग का सार्वभौमिक संदेश।

'योगस्थः कुरु कर्माणि' — योग में स्थित होकर कर्म करो
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षडंग विद्या • The Six Limbs of the Vedas

वेदांग (Vedanga)

वेदों के यथार्थ अर्थ, उच्चारण तथा विनियोग को समझने के लिए आवश्यक ६ वैज्ञानिक अंग

ध्वनि विज्ञानPhonetics

शिक्षा (Shiksha)

वेदमंत्रों के शुद्ध उच्चारण, स्वर व ध्वनि विधान का विज्ञान — वेदों की नासिका कही जाती है।

अनुष्ठान शास्त्रRitual

कल्प (Kalpa)

यज्ञ-विधान एवं व्यावहारिक जीवन के नियमों का निर्देश — वेदों के हाथ कहे जाते हैं।

भाषा शास्त्रGrammar

व्याकरण (Vyakarana)

संस्कृत भाषा के शब्द-रूप, रचना एवं शुद्धता का नियमन — पाणिनी के अष्टाध्यायी इसका सर्वोच्च प्रमाण है।

व्युत्पत्ति विज्ञानEtymology

निरुक्त (Nirukta)

वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति और उनके यथार्थ अर्थ का विधान — वेदों के कान कहे जाते हैं।

छंद शास्त्रMetrics

छंद (Chhanda)

वैदिक मंत्रों की गेयता एवं पद्य संरचना — गायत्री, त्रिष्टुप आदि प्रमुख छंद। वेदों के चरण माने गए हैं।

काल गणनाAstronomy

ज्योतिष (Jyotisha)

ग्रह-नक्षत्रों की गति एवं अनुष्ठानों के शुभ मुहूर्त का निर्धारण — वेदों के नेत्र कहे जाते हैं।

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खगोलीय एवं दैवीय शक्तियां • Celestial Energies

नवग्रह (Navagraha)

ब्रह्मांड में गतिशील नौ प्रमुख दिव्य शक्तियां, जो मानव भाग्य एवं प्रकृति के संतुलन को संचालित करती हैं।

१

सूर्य (Surya)

आत्मा के कारक एवं जगत के प्रत्यक्ष देवता — ऊर्जा, आत्मविश्वास व तेजस्विता के स्वामी।

२

चंद्र (Chandra)

मन एवं भावनाओं के स्वामी — शीतलता, मानसिक शांति एवं कल्पनाशीलता के अधिष्ठाता।

३

मंगल (Mangala)

शक्ति, पराक्रम एवं उत्साह के कारक — सेनापति ग्रह, साहस और भूमि-संपत्ति के प्रतीक।

४

बुध (Budha)

बुद्धि, वाणी व तार्किक क्षमता के दाता — संचार, व्यापार एवं विद्या में निपुणता प्रदान करते हैं।

५

गुरु / बृहस्पति (Guru)

ज्ञान, धर्म एवं सद्गुणों के दाता — देवताओं के गुरु, समृद्धि व विवेक के सर्वोच्च संरक्षक।

६

शुक्र (Shukra)

सौंदर्य, कला एवं ऐश्वर्य के कारक — दैत्यों के गुरु एवं भौतिक सुख-समृद्धि के अधिष्ठाता।

७

शनि (Shani)

कर्मफल प्रदाता एवं न्याय के अधिष्ठाता — अनुशासन, धैर्य और तपस्या के द्वारा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

८

राहु (Rahu)

छाया ग्रह, उत्तरी चंद्र पात — भ्रम, महत्वाकांक्षा व अचानक परिवर्तन के कारक।

९

केतु (Ketu)

छाया ग्रह, दक्षिणी चंद्र पात — मोक्ष, अध्यात्म तथा वैराग्य के कारक देवता।

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राशि चक्र • The Twelve Zodiac Signs

द्वादश राशि (Rashi)

भारतीय खगोल व ज्योतिष शास्त्र में ३६० डिग्री भचक्र को १२ समान भागों में विभाजित किया गया है।

अग्निAries

मेष (Mesha)

स्वामी: मंगल — साहसी, ऊर्जावान, नेतृत्व की क्षमता, पराक्रमी।

पृथ्वीTaurus

वृषभ (Vrishabha)

स्वामी: शुक्र — दृढ़ निश्चयी, व्यावहारिक, कला-प्रेमी, धैर्यवान।

वायुGemini

मिथुन (Mithuna)

स्वामी: बुध — संवादकुशल, जिज्ञासु, बहुमुखी प्रतिभा, बुद्धिमान।

जलCancer

कर्क (Karka)

स्वामी: चंद्र — संवेदनशील, ममतामयी, अंतःप्रेरक, निष्ठावान।

अग्निLeo

सिंह (Simha)

स्वामी: सूर्य — आत्मविश्वासी, उदार, राजसी स्वभाव, प्रभावशाली।

पृथ्वीVirgo

कन्या (Kanya)

स्वामी: बुध — विश्लेषक, परिश्रमी, व्यवस्थित, सेवाभावी।

वायुLibra

तुला (Tula)

स्वामी: शुक्र — न्यायप्रिय, संतुलित, सौहार्दपूर्ण, सौंदर्य-प्रेमी।

जलScorpio

वृश्चिक (Vrishchika)

स्वामी: मंगल — दृढ़ संकल्पी, गहन, रहस्यमयी, अंतर्दृष्टियुक्त।

अग्निSagittarius

धनु (Dhanu)

स्वामी: गुरु — आशावादी, सत्यनिष्ठ, दार्शनिक, ज्ञानपिपासु।

पृथ्वीCapricorn

मकर (Makara)

स्वामी: शनि — अनुशासित, महत्वाकांक्षी, कर्तव्यनिष्ठ, कर्मठ।

वायुAquarius

कुंभ (Kumbha)

स्वामी: शनि — मानवतावादी, मौलिक, स्वतंत्रचेता, दूरदर्शी।

जलPisces

मीन (Meena)

स्वामी: गुरु — दयालु, आध्यात्मिक, संवेदनशील, कल्पनाशील।