मास ०१
Spring • वसंत
चैत्र (Chaitra)
पहला मास, वसंत ऋतु का आगमन। चैत्र नवरात्रि और राम नवमी इसी मास में मनाई जाती है।
मास ०२
Summer • ग्रीष्म
वैशाख (Vaishakha)
ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ। अक्षय तृतीया इसी मास की प्रमुख व परम शुभ तिथि है।
मास ०३
Summer • ग्रीष्म
ज्येष्ठ (Jyeshtha)
वर्ष का सबसे गर्म मास। गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी इसी मास में आती है।
मास ०४
Monsoon • वर्षा
आषाढ़ (Ashadha)
वर्षा ऋतु का आरंभ। गुरु पूर्णिमा के साथ पावन चातुर्मास का शुभारंभ होता है।
मास ०५
Monsoon • वर्षा
श्रावण (Shravana)
भगवान शिव को समर्पित पवित्र मास। कांवड़ यात्रा और रक्षाबंधन इसी मास में मनाए जाते हैं।
मास ०६
Monsoon • वर्षा
भाद्रपद (Bhadrapada)
श्री कृष्ण जन्माष्टमी और दस दिवसीय गणेश चतुर्थी महाउत्सव इसी मास में मनाए जाते हैं।
मास ०७
Autumn • शरद
आश्विन (Ashwin)
शरद ऋतु का आगमन। शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा और विजयादशमी इसी मास में मनाए जाते हैं।
मास ०८
Autumn • शरद
कार्तिक (Kartika)
सर्वाधिक पुण्यदायी मास। दीपोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा और तुलसी विवाह इसी मास में मनाए जाते हैं।
मास ०९
Pre-Winter • हेमंत
मार्गशीर्ष (Margashirsha)
भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय मास ('मासानां मार्गशीर्षोऽहम्')। विवाह पंचमी इसी मास में मनाई जाती है।
मास १०
Winter • हेमंत
पौष (Pausha)
शीत ऋतु का मास, प्रत्यक्ष सूर्य देव को समर्पित। इसके अंत में मकर संक्रांति का महापर्व आता है।
मास ११
Late Winter • शिशिर
माघ (Magha)
पवित्र त्रिवेणी स्नान का मास। वसंत पंचमी, गुप्त नवरात्रि और माघ मेला इसी मास में मनाए जाते हैं।
मास १२
Spring • शिशिर
फाल्गुन (Phalguna)
संवत वर्ष का अंतिम मास। महाशिवरात्रि की पावन रात्रि और रंगों का महाउत्सव होली इसी मास में संपन्न होता है।
१. नंदा तिथि
प्रतिपदा (Pratipada)
प्रथम तिथि — स्वामी अग्नि देव। नवीन उत्सव, दीक्षा व मांगलिक कर्मों का आरंभ।
२. भद्रा तिथि
द्वितीया (Dwitiya)
द्वितीय तिथि — स्वामी ब्रह्मा जी। यात्रा, शिलान्यास एवं स्थायी कर्म हेतु शुभ।
३. जया तिथि
तृतीया (Tritiya)
तृतीय तिथि — स्वामी गौरी माता। अक्षय फल प्रदाता, विवाह एवं सौभाग्य कार्य।
४. रिक्ता तिथि
चतुर्थी (Chaturthi)
चतुर्थ तिथि — स्वामी श्री गणेश। विघ्न हरण, संकट मोचन एवं शत्रु शमन कर्म।
५. पूर्णा तिथि
पञ्चमी (Panchami)
पंचम तिथि — स्वामी नाग देवता। विद्यारंभ, औषध निर्माण व शुभ संस्कार।
६. नंदा तिथि
षष्ठी (Shashthi)
षष्ठ तिथि — स्वामी कार्तिकेय। यश, विजय, कांति व युद्ध विद्या अभ्यास।
७. भद्रा तिथि
सप्तमी (Saptami)
सप्तम तिथि — स्वामी सूर्य नारायण। यात्रा, वाहन क्रय एवं स्वास्थ्य लाभ।
८. जया तिथि
अष्टमी (Ashtami)
अष्टम तिथि — स्वामी भगवान शिव व दुर्गा। शक्ति उपासना, उपवास व व्रत।
९. रिक्ता तिथि
नवमी (Navami)
नवम तिथि — स्वामी दुर्गा माता व श्रीराम। पराक्रम, विजय व शस्त्र साधना।
१०. पूर्णा तिथि
दशमी (Dashami)
दशम तिथि — स्वामी यमराज व धर्म। धर्म कर्म, सत्य आचरण व विजय यात्रा।
११. नंदा तिथि
एकादशी (Ekadashi)
एकादश तिथि — स्वामी श्री हरि विष्णु। महाव्रत, उपवास, मोक्ष व भक्ति संवर्धन।
१२. भद्रा तिथि
द्वादशी (Dwadashi)
द्वादश तिथि — स्वामी विष्णु। पारण, दान, यज्ञ-हवन व ब्राह्मण सेवा।
१३. जया तिथि
त्रयोदशी (Trayodashi)
त्रयोदश तिथि — स्वामी कामदेव। प्रदोष व्रत, मित्रता, प्रेम व आरोग्य।
१४. रिक्ता तिथि
चतुर्दशी (Chaturdashi)
चतुर्दशी तिथि — स्वामी भगवान शिव। मासिक शिवरात्रि, रुद्रार्चन व आत्मशोधन।
१५. पूर्णा तिथि
पूर्णिमा / अमावस्या
पूर्णिमा (स्वामी चंद्र - प्रकाश) / अमावस्या (स्वामी पितृ - आत्मनिवेदन)।
सूर्य देव को समर्पित दिन। आरोग्य, तेजस्विता, नेत्र रक्षा और राजकार्य हेतु श्रेष्ठ।
चंद्र देव व देवाधिदेव महादेव को समर्पित। मानसिक शांति और भक्ति अनुष्ठान का दिन।
मंगल ग्रह व श्री हनुमान जी को समर्पित दिन। साहस, पराक्रम व संकट निवारण का दिन।
बुध ग्रह व प्रथम पूज्य गणेश जी को समर्पित। बुद्धि, व्यापार, वाणिज्य व लेखन हेतु शुभ।
देवगुरु बृहस्पति व भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित। ज्ञान, दर्शन, दीक्षा और धर्म कार्य।
शुक्र ग्रह व जगन्माता महालक्ष्मी को समर्पित। वैभव, कला, सौंदर्य, संगीत व समृद्धि हेतु।
न्यायाधीश शनि देव को समर्पित दिन। कर्म फल, वैराग्य, साधना, दान एवं सेवा का दिन।
०१
अश्विनी (Ashwini)
देवता: अश्विनी कुमार
शीघ्रता, उपचार और नई शुरुआत का नक्षत्र।
०२
भरणी (Bharani)
देवता: यम
जन्म, मृत्यु और परिवर्तन से जुड़ा नक्षत्र।
०३ • शुभ
कृत्तिका (Krittika)
देवता: अग्नि
तीक्ष्णता और शुद्धि का नक्षत्र; श्रीराम का जन्म नक्षत्र।
०४
रोहिणी (Rohini)
देवता: ब्रह्मा
सौंदर्य, समृद्धि और प्रजनन का शुभ नक्षत्र।
०५
मृगशिरा (Mrigashira)
देवता: चंद्रमा
खोज, कोमलता और सौम्यता का नक्षत्र।
०६
आर्द्रा (Ardra)
देवता: रुद्र
तूफान, परिवर्तन और ऊर्जा का नक्षत्र।
०७ • श्रीराम नक्षत्र
पुनर्वसु (Punarvasu)
देवता: अदिति
नवीनीकरण, घर वापसी और पुनः आशा का नक्षत्र।
०८ • नक्षत्र राज
पुष्य (Pushya)
देवता: बृहस्पति
सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र — पोषण, भक्ति और शुभता का प्रतीक।
०९
आश्लेषा (Ashlesha)
देवता: सर्प
गहरी अंतर्दृष्टि, रहस्य और कुंडलिनी शक्ति का नक्षत्र।
१०
मघा (Magha)
देवता: पितर
पूर्वजों की स्मृति, राजसत्ता और परंपरा का नक्षत्र।
११
पूर्वा फाल्गुनी (Purva Phalguni)
देवता: भग
विश्राम, आनंद और दांपत्य सुख का नक्षत्र।
१२
उत्तरा फाल्गुनी (Uttara Phalguni)
देवता: आर्यमन
मित्रता, विवाह और सामाजिक संबंधों का नक्षत्र।
१३
हस्त (Hasta)
देवता: सवितृ
कौशल, हस्तकला और उत्तम कार्यसिद्धि का नक्षत्र।
१४
चित्रा (Chitra)
देवता: विश्वकर्मा
सृजनशीलता, सौंदर्य और वास्तुकला का नक्षत्र।
१५
स्वाति (Swati)
देवता: वायु
स्वतंत्रता, लचीलापन और व्यापार का नक्षत्र।
१६
विशाखा (Vishakha)
देवता: इंद्र-अग्नि
लक्ष्यसिद्धि, दृढ़ता और विजय का नक्षत्र।
१७
अनुराधा (Anuradha)
देवता: मित्र
भक्ति, मित्रता और सहयोग का नक्षत्र।
१८
ज्येष्ठा (Jyeshtha)
देवता: इंद्र
वरिष्ठता, साहस और नेतृत्व का नक्षत्र।
१९
मूल (Mula)
देवता: निर्ऋति
जड़ों तक जाने, सत्य की खोज और मूल-शोध का नक्षत्र।
२०
पूर्वाषाढ़ा (Purva Ashadha)
देवता: आप (जल)
अजेयता, शुद्धि और प्रारंभिक विजय का नक्षत्र।
२१
उत्तराषाढ़ा (Uttara Ashadha)
देवता: विश्वेदेव
अंतिम विजय, सत्य और धर्म की स्थापना का नक्षत्र।
२२
श्रवण (Shravana)
देवता: विष्णु
श्रवण, सीखने और ज्ञान-प्राप्ति का पवित्र नक्षत्र।
२३
धनिष्ठा (Dhanishtha)
देवता: अष्टवसु
समृद्धि, संगीत और सामूहिक ऊर्जा का नक्षत्र।
२४
शतभिषा (Shatabhisha)
देवता: वरुण
उपचार, रहस्य और आत्मनिर्भरता का नक्षत्र।
२५
पूर्वाभाद्रपदा (Purva Bhadrapada)
देवता: अजैकपाद
तीव्रता, तपस्या और आंतरिक परिवर्तन का नक्षत्र।
२६
उत्तराभाद्रपदा (Uttara Bhadrapada)
देवता: अहिरबुध्न्य
गहराई, ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान का नक्षत्र।
२७
रेवती (Revati)
देवता: पूषन
यात्रा का समापन, पोषण और मोक्ष का अंतिम नक्षत्र।
विष्कम्भ (Vishkambha)
बाधा व अवरोध उत्पन्न करने वाला योग। शुभ कार्यों में त्यागनीय।
प्रीति (Priti)
परस्पर स्नेह, प्रेम व मैत्री भाव बढ़ाने वाला आनंददायक योग।
आयुष्मान् (Ayushman)
दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और चिरस्थायी कार्य सिद्ध करने वाला।
सौभाग्य (Saubhagya)
वैवाहिक सुख, अखंड सौभाग्य और समृद्धि प्रदायक योग।
शोभन (Shobhana)
सुंदरता, प्रतिष्ठा और शुभ संस्कारों हेतु अत्यंत फलदायी।
अतिगण्ड (Atiganda)
कठिनाई व संकटकारक। इसमें मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
सुकर्मा (Sukarma)
सत्कर्म, सेवा, व्यापार आरंभ व सफलता का द्योतक।
धृति (Dhriti)
धैर्य, स्थिरता और भूमि-गृह प्रवेश के लिए अनुकूल।
शूल (Shula)
पीड़ादायक एवं कष्टप्रद। शुभ कार्यों से सर्वथा दूर रहें।
गण्ड (Ganda)
विपत्ति कारक योग। शांति कर्म एवं आराधना आवश्यक।
वृद्धि (Vriddhi)
धन, यश, प्रतिष्ठा और संपत्ति में उत्तरोत्तर संवर्धन।
ध्रुव (Dhruva)
अटल व स्थायी कार्यों हेतु सर्वोत्कृष्ट — नींव रखना, शिलान्यास।
व्याघात (Vyaghata)
हिंसा व आघात का कारक। सावधानी व धैर्य अपेक्षित।
हर्षण (Harshana)
हर्ष, उल्लास, उत्सव और मनोकामना पूर्ति का योग।
वज्र (Vajra)
कठोरता और वज्रपात समान आघात का भय। शुभ कर्म त्याज्य।
सिद्धि (Siddhi)
सर्वकार्य सिद्धि, तंत्र-मंत्र साधना व सफलता प्रदाता।
व्यतीपात (Vyatipata)
भारी उत्पात व अनिष्ट का योग। दान-जप श्रेयस्कर।
वरीयान (Variyana)
श्रेष्ठता, मान-सम्मान व उच्च पद प्राप्ति हेतु अनुकूल।
परिघ (Parigha)
शत्रु पर विजय हेतु उत्तम, परंतु अन्य शुभ कार्यों में त्याज्य।
शिव (Shiva)
अत्यंत कल्याणकारी, सात्विक व धार्मिक अनुष्ठानों हेतु शुभ।
सिद्ध (Siddha)
सर्व मनोकामना सिद्ध करने वाला और कार्य निर्विघ्न बनाने वाला।
साध्य (Sadhya)
साधना, शिक्षण, दीक्षा और लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक।
शुभ (Shubha)
धर्म, धन, विद्या और उत्तम संस्कार का मंगलकारी योग।
शुक्ल (Shukla)
निर्मलता, ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक प्रकाश का प्रतीक।
ब्रह्म (Brahma)
ज्ञान, तपस्या, वेद-अध्ययन व परम शुभ फलदायक योग।
इन्द्र (Indra)
राजकीय कार्य, पदोन्नति, प्रभुत्व व नेतृत्व क्षमता विस्तार।
वैधृति (Vaidhriti)
विनाशक व प्रतिकूल प्रभाव। शांति पाठ एवं व्रत उत्तम।
बव (Bava)
स्वामी: इंद्र देव • प्रतीक: सिंह
आरोग्य, शक्ति-संवर्धन, पौष्टिक व स्थायी कार्यों हेतु शुभ।
बालव (Balava)
स्वामी: ब्रह्मा जी • प्रतीक: चीता
धार्मिक अनुष्ठान, अध्ययन, यज्ञ-हवन व विद्यारंभ हेतु श्रेष्ठ।
कौलव (Kaulava)
स्वामी: मित्र (सूर्य) • प्रतीक: सुअर
मैत्री, प्रेम, संबंध विस्तार और साझेदारी कर्मों के लिए उत्तम।
तैतिल (Taitila)
स्वामी: अर्यमा • प्रतीक: गधा
शिल्पकला, गृह निर्माण, वस्त्र-आभूषण धारण हेतु अनुकूल।
गर (Gara)
स्वामी: पृथ्वी • प्रतीक: हाथी
कृषि कार्य, बीज बोना, भूमि क्रय और रोपण हेतु सर्वश्रेष्ठ।
वणिज (Vanija)
स्वामी: श्री लक्ष्मी • प्रतीक: बैल
व्यापार, क्रय-विक्रय, लेन-देन और आर्थिक निवेश में शुभ।
विष्टि / भद्रा (Vishti / Bhadra)
स्वामी: यमराज • प्रतीक: कुत्ता
अत्यंत अशुभ व विघातक। विवाह, यात्रा व मांगलिक कर्म सर्वथा वर्जित।
शकुनि (Shakuni)
स्वामी: कलियुग • पक्ष: कृष्ण चतुर्दशी (द्वितीय अर्ध)
औषध सेवन, तंत्र-मंत्र सिद्धि एवं रोगोपचार हेतु फलदायी।
चतुष्पद (Chatushpada)
स्वामी: वृषभ • पक्ष: अमावस्या (प्रथम अर्ध)
गोदान, पशुपालन, पितृ श्राद्ध व तर्पण हेतु विशेष फलदायी।
नाग (Naga)
स्वामी: सर्पराज • पक्ष: अमावस्या (द्वितीय अर्ध)
क्रूर व उग्र कर्म हेतु उपयुक्त; मांगलिक कार्यों में पूर्ण वर्जित।
किंस्तुघ्न (Kimstughna)
स्वामी: वायु देव • पक्ष: शुक्ल प्रतिपदा (प्रथम अर्ध)
सभी प्रकार के मांगलिक कर्म, उत्सव और शुभ आरंभ हेतु अनुकूल।